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Dipendra Singh 'Raaz'
todakar ke dil kisi ka kis tarah rahte hain KHush
todakar ke dil kisi ka kis tarah rahte hain KHush | तोड़कर के दिल किसी का किस तरह रहते हैं ख़ुश
- Dipendra Singh 'Raaz'
तोड़कर
के
दिल
किसी
का
किस
तरह
रहते
हैं
ख़ुश
जाते
जाते
कम
से
कम
ये
मश्वरा
दे
दो
मुझे
- Dipendra Singh 'Raaz'
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आप
चाहें
तो
कहीं
और
भी
रह
सकते
हैं
दिल
हमारा
है
तो
मर्ज़ी
भी
हमारी
होगी
Shamsul Hasan ShamS
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उम्र
गुज़री
दवाएँ
करते
'मीर'
दर्द-ए-दिल
का
हुआ
न
चारा
हनूज़
Meer Taqi Meer
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ये
कहते
हो
तिरे
जाने
से
दिल
को
चैन
आएगा
तो
जाता
हूँ,
ख़ुदा
हाफ़िज़!
मगर
तुम
झूठ
कहते
हो
Zubair Ali Tabish
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बन
कर
कसक
चुभती
रही
दिल
में
मिरे
इक
आह
थी
ऐ
हम–नफ़स
मेरे
मुझे
तुझ
सेे
वफ़ा
की
चाह
थी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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किस
तरह
'अमानत'
न
रहूँ
ग़म
से
मैं
दिल-गीर
आँखों
में
फिरा
करती
है
उस्ताद
की
सूरत
Amanat Lakhnavi
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तुम्हारे
ख़त
को
जलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
ये
दिल
बाहर
निकलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
तुम्हारा
फ़ैसला
है
पास
रुकना
या
नहीं
रुकना
मेरी
क़िस्मत
बदलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
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Tanoj Dadhich
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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दिल
गया
रौनक़-ए-हयात
गई
ग़म
गया
सारी
काएनात
गई
Jigar Moradabadi
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मसअला
फिर
वही
बे-घर
हुए
लोगों
का
है
हम
सभी
दिल
से
निकाले
कहाँ
तक
जाएँगे
Neeraj Neer
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हम
को
दिल
से
भी
निकाला
गया
फिर
शहरस
भी
हम
को
पत्थर
से
भी
मारा
गया
फिर
ज़हरस
भी
Azm Shakri
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ग़मों
के
भँवर
में
फँसे
तो
ये
समझे
घड़ी
दो
घड़ी
की
ख़ुशी
भी
ख़ुशी
थी
Dipendra Singh 'Raaz'
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सीने
से
लगा
लो
मुझे
तुम
इक
दफ़ा
आकर
स्वेटर
से
मेरी
जान
ये
सर्दी
नहीं
रुकती
Dipendra Singh 'Raaz'
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तुम
न
टूटो
कभी
भी
इसलिए
पत्थर
है
कहा
मैं
तुम्हें
फूल
जो
कहता
तो
बिखर
जाती
तुम
Dipendra Singh 'Raaz'
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उम्र
के
आख़िरी
दिनों
में
भी
तेरी
तस्वीर
साफ़
दिखती
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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मैंने
फिर
हँस
के
उसे
कह
दिया
अल्लाह
हाफ़िज़
बारहा
देख
रही
थी
वो
घड़ी
की
जानिब
Dipendra Singh 'Raaz'
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