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Dipendra Singh 'Raaz'
gale milnaa muqaddar men kahaan hai
gale milnaa muqaddar men kahaan hai | गले मिलना मुकद्दर में कहाँँ है
- Dipendra Singh 'Raaz'
गले
मिलना
मुकद्दर
में
कहाँँ
है
हमारी
ईद
फिर
से
राएगांँ
हैै
'वो
मेरी
ज़िंदगी'
उनवान
से
जो
मेरी
जो
नज़्म
है,
इक
दास्तांँ
है
मेरी
छोड़ो
मुझे
बस
ये
बता
दो
मेरा
वो
शख़्स
तो
ख़ुश
है,
जहाँँ
है
हमारी
रूह
तक
में
है
उदासी
हमारा
जिस्म
ही
इसका
मकाँँ
है
- Dipendra Singh 'Raaz'
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रात
बेचैन
सी
सर्दी
में
ठिठुरती
है
बहुत
दिन
भी
हर
रोज़
सुलगता
है
तिरी
यादों
से
Amit Sharma Meet
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उदासी
का
सबब
दो
चार
ग़म
होते
तो
कह
देता
फ़ुलाँ
को
भूल
बैठा
हूँ
फ़ुलाँ
की
याद
आती
है
Ashu Mishra
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अब
ये
सोचा
है
बस
ख़ुश
रहेंगे
दिल
उदासी
से
उकता
गया
है
Sapna Moolchandani
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उस
ख़ूब-रू
से
रब्त
ज़रा
कम
हुआ
मेरा
ये
देख
कर
उदासी
मेरे
संग
लग
गई
Siddharth Saaz
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कोई
इतना
प्यारा
कैसे
हो
सकता
है
फिर
सारे
का
सारा
कैसे
हो
सकता
है
तुझ
सेे
जब
मिलकर
भी
उदासी
कम
नहीं
होती
तेरे
बग़ैर
गुज़ारा
कैसे
हो
सकता
है
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Jawwad Sheikh
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तुम्हारी
एक
हरकत
से
उदासी
आए
चेहरे
पर
किसी
को
इस
तरह
भी
मत
करो
लाचार
होली
में
Vijay Anand Mahir
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हाँ
यही
मेरी
ख़ुद-शनासी
है
जिस्म
ताज़ा
है
रूह
बासी
है
सब
हँसी
को
हँसी
समझते
हैं
तुम
तो
समझो
हँसी
उदासी
है
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Armaan khan
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उदासी
का
सबब
उस
सेे
जो
हम
तब
पूछ
लेते
वजह
फिर
पूछनी
पड़ती
न
शायद
ख़ुद-कुशी
की
Dipendra Singh 'Raaz'
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हमारे
घर
की
दीवारों
पे
'नासिर'
उदासी
बाल
खोले
सो
रही
है
Nasir Kazmi
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बड़ी
जल्दी
में
था
उस
दिन
ज़रा
बेचैन
भी
था
वो
उसे
कहना
था
कुछ
मुझ
सेे
मगर
वो
कह
नहीं
पाया
Varun Anand
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बशर्ते
आग
लग
जाए
मेरे
ख़ाली
मकाँ
में
फिर
उजाला
गर
न
हो
यादों
का
तेरी
इस
मकाँ
में
तो
Dipendra Singh 'Raaz'
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उस
सेे
कटता
नहीं
था
फ़ोन
मेरा
ज़िंदगी
कैसे
काटती
होगी
Dipendra Singh 'Raaz'
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लम्स
दिल
पर
है
तुम्हारा
मेरे
मैंने
आँखों
से
छुआ
है
तुमको
Dipendra Singh 'Raaz'
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जब
से
पंछी
खो
गए
हैं
पेड़
गूँगे
हो
गए
हैं
मौत
जैसा
कुछ
नहीं
है
थक
चुके
जो
सो
गए
हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
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चल
रहे
दफ़्तर
हैं
अफ़सर
सो
रहे
हैं
खिड़कियाँ
हैं
जागती
दर
सो
रहे
हैं
सोख
लेते
हैं
ये
तकिए
आँसुओं
को
मुतमइन
होके
सो
बिस्तर
सो
रहे
हैं
ऐन
मुमकिन
है
कोई
तूफ़ान
आए
एक
अरसे
से
समुंदर
सो
रहे
हैं
ये
नहीं
है
वक़्त
हमला
बोलने
का
देखिए
उस
पार
लश्कर
सो
रहे
हैं
कुछ
नहीं
मालूम
कब
उठ
जाए
ये
फिर
दर्द
जो
सीने
के
अंदर
सो
रहे
हैं
ख़्वाब
में
भी
अश्क
ही
आएँगे
अब
तो
मीर
का
दीवान
पढ़
कर
सो
रहे
हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
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