maasoom dil ki hasratein lafzon men dhaal kar | मासूम दिल की हसरतें लफ़्ज़ों में ढाल कर

  - Dinesh Kumar Drouna
मासूमदिलकीहसरतेंलफ़्ज़ोंमेंढालकर
रखेहैंहमनेधूपमेंजुगनूनिकालकर
हैशिद्दत-ए-तलबकामिरेअलमियायही
रखदेमेरीप्याससमुंदरउबालकर
चलतीनहींमोहब्बतोंमेंजल्द-बाज़ियाँ
होतेनहींयेफ़ैसलेसिक्केउछालकर
वा'दोंकेजोखिलौनेथमाकरगयाथातू
मैंनेभीरखदिएहैंकहींपरसँभालकर
फिरयूँँहुआकिसब्ज़होउठावोरेगज़ार
निकलेजबउनकेहाथमेंहमहाथडालकर
तुझसेजिरहकरूँँगामगरशर्तहैयही
जिसकाजवाबतूहोमुझेवोसवालकर
इकनाज़नींकादिलहुआहैगुम-शुदाकहीं
औरहमखड़ेहैंसामनेजेबेंनिकालकर
  - Dinesh Kumar Drouna
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