aag lag jaayegi ik din mirii sarshaari ko | आग लग जाएगी इक दिन मिरी सरशारी को

  - Dilawar Ali Aazar
आगलगजाएगीइकदिनमिरीसरशारीको
मैंजोदेताहूँहवारूहकीचिंगारीको
वर्नायेलोगकहाँअपनीहदोंमेंरहते
मैंनेमाक़ूलकियाहाशिया-बर्दारीको
येपरिंदेहैंकिदरवेशहैंज़िंदानोंके
कुछसमझतेहीनहींअम्र-ए-गिरफ़्तारीको
अबहमेंज़िंदगीकरनेमेंसुहूलतदीजाए
खींचलाएहैंयहाँतकतोगिराँ-बारीको
एकतूफ़ान-ए-बला-ख़ेज़नेमंज़रबदला
पेड़तय्यारहुएरस्म-ए-निगूँ-सारीको
उसनेवोज़हरहवाओंमेंमिलायाहैकिअब
कोंपलेंसरउठाएँगीनुमूदारीको
कौनखींचेगामिरेजिस्मकीज़ंजीर'आज़र'
कौनआसानकरेगामिरीदुश्वारीको
  - Dilawar Ali Aazar
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