jahaan tak ishq ki taufeeq hai rangeen banaate hain | जहाँ तक इश्क़ की तौफ़ीक़ है रंगीं बनाते हैं

  - Dil Shahjahanpuri
जहाँतकइश्क़कीतौफ़ीक़हैरंगींबनातेहैं
वोसुनतेहैंहमउनकोसर-गुज़िश्त-ए-दिलसुनातेहैं
उधरहक़-उल-यक़ींहैअबवोआतेअबवोआतेहैं
उधरअंजुममिरीइसज़ेहनियतपरमुस्कुरातेहैं
शब-ए-ग़मऔरमहजूरीयेआलमऔरमजबूरी
टपकपड़तेहैंआँसूजबवोहमकोयादआतेहैं
वहींसेदर्स-ए-हुस्न-ओ-इश्क़काआग़ाज़होताहै
जहाँसेवाक़िआ'त-ए-ज़िंदगीहमभूलजातेहैं
हमेंकुछइश्क़केमफ़्हूमपरहैतब्सिराकरना
इकआह-ए-सर्दकोउनवान-ए-शरह-ए-ग़मबनातेहैं
बहाकरअश्क-ए-ख़ूँखींचीथींजोआईना-ए-दिलमें
हमउनमौहूमतस्वीरोंकोअबरंगींबनातेहैं
शबाब-ए-ज़िंदगीजल्वोंकाइकमा'सूमनज़्ज़ारा
हमेंदिलवोअफ़्सानेअभीतकयादआतेहैं
  - Dil Shahjahanpuri
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