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Dhiraj Singh 'Tahammul'
saath diya hai kisne kiska kiski sohbat kaun chalega
saath diya hai kisne kiska kiski sohbat kaun chalega | साथ दिया है किसने किसका किसकी सोहबत कौन चलेगा
- Dhiraj Singh 'Tahammul'
साथ
दिया
है
किसने
किसका
किसकी
सोहबत
कौन
चलेगा
मेरी
ज़िल्लत
मेरी
ख़िफ़्फ़त
लेकर
तोहमत
कौन
चलेगा
- Dhiraj Singh 'Tahammul'
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एक
काटा
राम
ने
सीता
के
साथ
दूसरा
वनवास
मेरे
नाम
पर
Nasir Shahzad
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दर्द-ए-मुहब्बत
दर्द-ए-जुदाई
दोनों
को
इक
साथ
मिला
तू
भी
तन्हा
मैं
भी
तन्हा
आ
इस
बात
पे
हाथ
मिला
Abrar Kashif
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तू
उसके
दिल
में
जगह
चाहता
है
यार
जो
शख़्स
किसी
को
देता
नहीं
अपने
साथ
वाली
जगह
Umair Najmi
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गर
डूबना
ही
अपना
मुक़द्दर
है
तो
सुनो
डूबेंगे
हम
ज़रूर
मगर
नाख़ुदा
के
साथ
Kaifi Azmi
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मशवरा
हम
भी
तो
दे
सकते
थे
पर
तेरा
साथ
दे
रहे
थे
हम
Vishal Singh Tabish
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जाने
अब
वो
किसके
साथ
निकलता
होगा
रातों
को
जाने
कौन
लगाता
होगा
दो
घंटे
तैयारी
में
Danish Naqvi
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जो
न
खेली
होली
'अमृत'
के
साथ
में
हाथों
में
दीवाली
तक
गुलाल
रहेगा
Amritanshu Sharma
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सिर्फ़
तस्वीर
रह
गई
बाक़ी
जिस
में
हम
एक
साथ
बैठे
हैं
Ataul Hasan
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सँभलता
हूँ
तो
ये
लगता
है
जैसे
तुम्हारे
साथ
धोखा
कर
रहा
हूँ
Shariq Kaifi
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जो
मेरे
साथ
मोहब्बत
में
हुई
आदमी
एक
दफा
सोचेगा
रात
इस
डर
में
गुजारी
हमने
कोई
देखेगा
तो
क्या
सोचेगा
Tehzeeb Hafi
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ख़ुदाया
ज़िंदगी
में
काश
ये
वक़्फ़ा
नहीं
होता
यहाँ
पेशानियों
का
बोझ
तक
हल्का
नहीं
होता
गुज़र
जाते
ये
दिन
हैं
वाक़िआत-ए-रोज़-मर्रा
में
मगर
ये
रात
का
साया
कभी
धुँदला
नहीं
होता
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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इश्क़
को
ढोता
हुआ
इक
ख़र
गया
मुझ
में
अक़्ल
कुछ
बाक़ी
थी
आके
चर
गया
मुझ
में
फ़लसफ़ी
अंदाज़
ये
है
आपकी
नेमत
शा'इरी
करता
था
जो
कल
मर
गया
मुझ
में
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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अभी
हमको
मुनासिब
आप
होते
से
नहीं
लगते
ब–चश्म–ए–तर
मुख़ातिब
हैं
प
रोते
से
नहीं
लगते
वही
दर्या
बहुत
गहरा
वही
तैराक
हम
अच्छे
हुआ
है
दफ़्न
मोती
अब
कि
गोते
से
नहीं
लगते
ये
आई
रात
आँखों
को
चलो
खूँ–खूँ
किया
जाए
बदन
ये
सो
भी
जाए
आँख
सोते
से
नहीं
लगते
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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शाम
को
दीदार
अपना
आइने
में
हो
गया
फ़ाश
सब
किरदार
अपना
आइने
में
हो
गया
बरगुज़ीदा
एक
सूरत
क़ैद
आँखों
में
हुई
और
बस
घर-बार
अपना
आइने
में
हो
गया
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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चराग़ाँ
ढूँढते
हैं
आतिश-ए-दिल
को
बुझाने
को
मुहब्बत
की
समझ
दे
कौन
इस
जाहिल
ज़माने
को
फ़रार-ए-क़ैद
लेकर
उड़
गया
ख़ुशियाँ
घराने
की
किया
था
क़ैद
इक
पंछी
कि
घर
का
दिल
लगाने
को
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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