vahii ho ilm bhi vo hi sukhun to baat bane | वही हो इल्म भी वो ही सुख़न तो बात बने

  - Dheerendra Singh Faiyaz
वहीहोइल्मभीवोहीसुख़नतोबातबने
ग़ज़लकाभीवहीहोपैरहनतोबातबने
फ़क़तहैएकपरेशाँतोफिरयेइश्क़नहीं
जबींपेदोनोंकीआएशिकनतोबातबने
हमारीरूहकोफिरभीबदनमिलाहैमगर
बदनकोभीमिलेकोईबदनतोबातबने
हमउसकीआँखोंसेइक़रारतकपहुँचगएहैं
ज़रासापढ़नेकोमिलजाएमनतोबातबने
भटकतेरहनेसेइसदिलकेहक़मेंक्याहोगा
किसीकेइश्क़मेंहोजामगनतोबातबने
मैंतेरेख़्वाबकोपहनेहुएहूँआँखोंमें
तूमेरीआँखमेंनींदेंपहनतोबातबने
अगरचेजिस्मकोथोड़ीथकनसीहैलेकिन
हमारीआँखोंपेछाएथकनतोबातबने
  - Dheerendra Singh Faiyaz
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