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Deepika Jain
dost aansoo pochkar bhi saccha lagta kyun nahin
dost aansoo pochkar bhi saccha lagta kyun nahin | दोस्त आँसू पोछकर भी सच्चा लगता क्यूँँंँ नहीं
- Deepika Jain
दोस्त
आँसू
पोछकर
भी
सच्चा
लगता
क्यूँँंँ
नहीं
कुछ
ग़लत
देखा
तू
ने
तो
मुझ
सेे
पूछा
क्यूँँंँ
नहीं
- Deepika Jain
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फ़ुज़ूल-ख़र्ची
नहीं
करेंगे
Rehman Faris
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क्या
कहा
दोस्त
समझना
है
तुम्हें
प्यार
नहीं
यानी
बस
देखना
है
पानी
को
पीना
नहीं
है
Neeraj Neer
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मकाँ
तो
है
नहीं
जो
खींच
दें
दीवार
इस
दिल
में
कोई
दूजा
नहीं
रह
पाएगा
अब
यार
इस
दिल
में
जहाँ
भर
में
लुटाते
फिर
रहे
है
कम
नहीं
होता
तुम्हारे
वास्ते
इतना
रखा
था
प्यार
इस
दिल
में
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Bhaskar Shukla
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उसको
जो
कुछ
भी
कहूँ
अच्छा
बुरा
कुछ
न
करे
यार
मेरा
है
मगर
काम
मेरा
कुछ
न
करे
दूसरी
बार
भी
पड़
जाए
अगर
कुछ
करना
आदमी
पहली
मोहब्बत
के
सिवा
कुछ
न
करे
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Abid Malik
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सख़्त
सर्दी
में
ठिठुरती
है
बहुत
रूह
मिरी
जिस्म-ए-यार
आ
कि
बेचारी
को
सहारा
मिल
जाए
Farhat Ehsaas
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एक
आवाज़
कि
जो
मुझको
बचा
लेती
है
ज़िन्दगी
आख़री
लम्हों
में
मना
लेती
है
जिस
पे
मरती
हो
उसे
मुड़
के
नहीं
देखती
वो
और
जिसे
मारना
हो
यार
बना
लेती
है
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Ali Zaryoun
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अपने
में'यार
से
नीचे
तो
मैं
आने
से
रहा
शे'र
भूखा
हूँ
मगर
घास
तो
खाने
से
रहा
Mehshar Afridi
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ज़रा
विसाल
के
बाद
आइना
तो
देख
ऐ
दोस्त
तिरे
जमाल
की
दोशीज़गी
निखर
आई
Firaq Gorakhpuri
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वो
हिंदू,
मैं
मुस्लिम,
ये
सिक्ख,
वो
ईसाई
यार
ये
सब
सियासत
है
चलो
इश्क़
करें
Rahat Indori
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ख़ुद
को
शीशा
कर
लिया
है
यार
मैंने
अब
तो
तेरा
देखना
बनता
है
मुझ
को
Neeraj Neer
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माँ
नहीं
"दीप"
दुनिया
में
तेरे
पास
दूर
तू
कैसे
फिर
थकान
करे
Deepika Jain
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बनकर
हकीम
आएँ
जो
ज़ख़्मों
को
और
मसल
गए
Deepika Jain
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मोहब्बत
पे
लिखी
ग़ज़लें
हज़ारों
पिता
पर
शे'र
क्या
लिखता
है
कोई
Deepika Jain
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तेरे
हाथों
दफ़न
होकर
सोचती
हूँ
ये
ही
'दीप'
प्यार
के
बदले
ख़ुदा
भी
प्यार
लिखता
क्यूँँंँ
नहीं
Deepika Jain
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सच्ची
उल्फ़त
करके
हम
दोनों
ही
पछताएँ
यहाँ
मैं
तुझी
से
हारी
लेकिन
तू
भी
जीता
क्यूँँ
नहीं
Deepika Jain
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