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Deepika Jain
maa nahin deep duniya men tere paas
maa nahin deep duniya men tere paas | माँ नहीं "दीप" दुनिया में तेरे पास
- Deepika Jain
माँ
नहीं
"दीप"
दुनिया
में
तेरे
पास
दूर
तू
कैसे
फिर
थकान
करे
- Deepika Jain
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परतव
से
जिस
के
आलम-ए-इम्काँ
बहार
है
वो
नौ-बहार-ए-नाज़
अभी
रहगुज़र
में
है
Ali Sardar Jafri
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यक़ीं
मोहकम
अमल
पैहम
मोहब्बत
फ़ातेह-ए-आलम
जिहाद-ए-ज़िंदगानी
में
हैं
ये
मर्दों
की
शमशीरें
Allama Iqbal
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हम
क्या
करें
अगर
न
तिरी
आरज़ू
करें
दुनिया
में
और
भी
कोई
तेरे
सिवा
है
क्या
Hasrat Mohani
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ग़म
और
ख़ुशी
में
फ़र्क़
न
महसूस
हो
जहाँ
मैं
दिल
को
उस
मक़ाम
पे
लाता
चला
गया
Sahir Ludhianvi
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जहाँ
इंसानियत
वहशत
के
हाथों
ज़ब्ह
होती
हो
जहाँ
तज़लील
है
जीना
वहाँ
बेहतर
है
मर
जाना
Gulzar Dehlvi
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जब
आ
जाती
है
दुनिया
घूम
फिर
कर
अपने
मरकज़
पर
तो
वापस
लौट
कर
गुज़रे
ज़माने
क्यूँँ
नहीं
आते
Ibrat Machlishahri
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चलो
ऐ
हिंद
के
सैनिक
कि
लहराएँ
तिरंगा
हम
जिसे
दुनिया
नमन
करती
है
उस
पर्वत
की
चोटी
पर
ATUL SINGH
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एक
हमें
आवारा
कहना
कोई
बड़ा
इल्ज़ाम
नहीं
दुनिया
वाले
दिल
वालों
को
और
बहुत
कुछ
कहते
हैं
Habib Jalib
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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जहाँ
जो
था
वहीं
रहना
था
उस
को
मगर
ये
लोग
हिजरत
कर
रहे
हैं
Liaqat Jafri
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ग़मों
को
दफ़्न
कर
हँसता
है
कोई
सिसक
के
रोता
वो
बच्चा
है
कोई
Deepika Jain
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दिल
पे,
ये
दुनिया
जब
निशान
करे
दर्द
ग़ज़लों
में
तब
बयान
करे
बेच
पाता
मैं
अपने
भी
ग़म
को
गर
ग़मों
की
कोई
दुकान
करे
मतलबी
लोग
सोचते
हैं
यही
सब
उन्हीं
का
महज़
बखान
करे
देखते
रह
गए
अमीर
सभी
कोई
मुफलिस
यहाँँ
पे
दान
करे
मांँ
नहीं
"दीप"
दुनिया
में
तेरे
पास
दूर
तू
कैसे
फिर
थकान
करे
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Deepika Jain
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ग़ज़ल
में
'दीप'
ने
ख़ुद
को
समेटा
मगर
हर्फ़ों
में
याँ
बिखरा
है
कोई
Deepika Jain
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मेरे
मरने
की
दु'आ
मांँग
रहे
थे
जो
'दीप'
बद्दुआ
में
ही
मुझे
उनका
हुनर
लगता
है
Deepika Jain
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साथ
जीने
मरने
के
वादे
किए
थे
हमने
तो
मार
कर
तू
ही
मुझे
फिर
साथ
लेटा
क्यूँँंँ
नहीं
Deepika Jain
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