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Deepika Jain
apne chehre pe hañsi hardam sajaaye rakhta vo
apne chehre pe hañsi hardam sajaaye rakhta vo | अपने चेहरे पे हँसी हरदम सजाए रखता वो
- Deepika Jain
अपने
चेहरे
पे
हँसी
हरदम
सजाए
रखता
वो
सामने
दुनिया
के
झूठा
हँस
के
थकता
क्यूँँ
नहीं
- Deepika Jain
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वो
रातें
चाँद
के
साथ
गईं
वो
बातें
चाँद
के
साथ
गईं
अब
सुख
के
सपने
क्या
देखें
जब
दुख
का
सूरज
सर
पर
हो
Ibn E Insha
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तू
अपने
घर
में
मुहब्बत
की
जीत
पर
ख़ुश
है
अभी
ठहर
के
मेरा
ख़ानदान
बाक़ी
है
Siraj Faisal Khan
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ज़िंदगी
कितनी
मसर्रत
से
गुज़रती
या
रब
ऐश
की
तरह
अगर
ग़म
भी
गवारा
होता
Akhtar Shirani
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हाँ
यही
मेरी
ख़ुद-शनासी
है
जिस्म
ताज़ा
है
रूह
बासी
है
सब
हँसी
को
हँसी
समझते
हैं
तुम
तो
समझो
हँसी
उदासी
है
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Armaan khan
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उदास
लोग
इसी
बात
से
हैं
ख़ुश
कि
चलो
हमारे
साथ
हुए
हादसों
की
बात
हुई
Abhishar Geeta Shukla
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जाने
कैसे
ख़ुश
रहने
की
आदत
डाली
जाती
है
उनके
यहाँ
तो
बारिश
में
भी
धूप
निकाली
जाती
है
Ritesh Rajwada
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नाम
पे
हम
क़ुर्बान
थे
उस
के
लेकिन
फिर
ये
तौर
हुआ
उस
को
देख
के
रुक
जाना
भी
सब
से
बड़ी
क़ुर्बानी
थी
मुझ
से
बिछड़
कर
भी
वो
लड़की
कितनी
ख़ुश
ख़ुश
रहती
है
उस
लड़की
ने
मुझ
से
बिछड़
कर
मर
जाने
की
ठानी
थी
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Jaun Elia
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चंद
कलियाँ
नशात
की
चुन
कर
मुद्दतों
महव-ए-यास
रहता
हूँ
तेरा
मिलना
ख़ुशी
की
बात
सही
तुझ
से
मिल
कर
उदास
रहता
हूँ
Sahir Ludhianvi
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तुम
इन
लबों
की
हँसी
और
ख़ुशी
पे
मत
जाना
ये
रोज़
रोज़
हमें
भी
फ़रेब
देते
हैं
Shadab Asghar
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दिलों
को
तेरे
तबस्सुम
की
याद
यूँँ
आई
कि
जगमगा
उठें
जिस
तरह
मंदिरों
में
चराग़
Firaq Gorakhpuri
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अपने
चेहरे
में
हँसी
हरदम
सजाए
रखता
वो
सामने
दुनिया
के
झूठा
हँस
के
थकता
क्यूँँ
नहीं
Deepika Jain
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तेरे
हाथों
दफ़न
होकर
सोचती
हूँ
ये
ही
'दीप'
प्यार
के
बदले
ख़ुदा
भी
प्यार
लिखता
क्यूँँंँ
नहीं
Deepika Jain
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दिल
पे,
ये
दुनिया
जब
निशान
करे
दर्द
ग़ज़लों
में
तब
बयान
करे
बेच
पाता
मैं
अपने
भी
ग़म
को
गर
ग़मों
की
कोई
दुकान
करे
मतलबी
लोग
सोचते
हैं
यही
सब
उन्हीं
का
महज़
बखान
करे
देखते
रह
गए
अमीर
सभी
कोई
मुफलिस
यहाँँ
पे
दान
करे
मांँ
नहीं
"दीप"
दुनिया
में
तेरे
पास
दूर
तू
कैसे
फिर
थकान
करे
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Deepika Jain
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मुझे
ख़्वाबों
में
देखोगे
भी
कैसे
तुम्हारे
दिल
में
जब
रहता
है
कोई
Deepika Jain
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जिन
घरों
में
मुझे
रौनकें
दिखती
थीं
घर
वही
दिखते
क्यूँ
आज
वीरान
हैं
Deepika Jain
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