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Deepali Agarwal
bas ab duniya se parda chahti hooñ
bas ab duniya se parda chahti hooñ | बस अब दुनिया से पर्दा चाहती हूँ
- Deepali Agarwal
बस
अब
दुनिया
से
पर्दा
चाहती
हूँ
में
सब
से
दूर
रहना
चाहती
हूँ
सितारों
की
तरह
या
गुल
के
जैसे
जवानी
में
ही
मरना
चाहती
हूँ
वो
एक
तस्वीर
जो
बनती
नहीं
है
उसी
में
रंग
भरना
चाहती
हूँ
किताबों
को
उठा
कर
गोद
में
यूँँ
मैं
कोई
शे'र
कहना
चाहती
हूँ
मुझे
भी
इल्म
है
दुनिया
का
सारा
मैं
धीमी
मौत
मरना
चाहती
हूँ
- Deepali Agarwal
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चुप
रहते
हैं
चुप
रहने
दो
राज़
बताओ
खोले
क्या
बात
वफ़ा
की
तुम
करती
हो
बोलो
हम
कुछ
बोले
क्या
उल्फ़त
तो
अफ़साना
है
तुम
करती
खूब
सियासत
हो
हम
भी
हैं
मक़बूल
बहुत
अब
बोल
किसी
के
होलें
क्या
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Anand Raj Singh
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सब
ने
माना
मरने
वाला
दहशत-गर्द
और
क़ातिल
था
माँ
ने
फिर
भी
क़ब्र
पे
उस
की
राज-दुलारा
लिक्खा
था
Ahmad Salman
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अब
मज़ीद
उस
सेे
ये
रिश्ता
नहीं
रक्खा
जाता
जिस
सेे
इक
शख़्स
का
पर्दा
नहीं
रक्खा
जाता
पढ़ने
जाता
हूँ
तो
तस्में
नहीं
बाँधे
जाते
घर
पलटता
हूँ
तो
बस्ता
नहीं
रक्खा
जाता
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Tehzeeb Hafi
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सजनी
की
आँखों
में
छुप
कर
जब
झाँका
बिन
होली
खेले
ही
साजन
भीग
गया
Musavvir Sabzwari
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जवाँ
होने
लगे
जब
वो
तो
हम
से
कर
लिया
पर्दा
हया
यक-लख़्त
आई
और
शबाब
आहिस्ता
आहिस्ता
Ameer Minai
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चादर
की
इज़्ज़त
करता
हूँ
और
पर्दे
को
मानता
हूँ
हर
पर्दा
पर्दा
नइँ
होता
इतना
मैं
भी
जानता
हूँ
Ali Zaryoun
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ये
गहरा
राज़
है
इसका
बदन
को
खा
ही
जाती
है
मोहब्बत
पाक
होकर
भी
हवस
तक
आ
ही
जाती
है
ALI ZUHRI
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अव्वल
तो
तेरी
दोस्ती
पर
शक
नहीं
कोई
और
दूसरा
ये
मुझको
तेरे
राज़
पता
हैं
Tanoj Dadhich
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सभी
से
राज़
कह
देता
हूँ
अपने
न
जाने
क्या
छुपाना
चाहता
हूँ
Shariq Kaifi
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यूँँ
बे-तरतीब
ज़ख़्मों
ने
बताया
राज़
क़ातिल
का
सलीके
से
जो
मेरा
क़त्ल
गर
होता
तो
क्या
होता
Vikram Gaur Vairagi
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इश्क़
का
पन्ना
कहीं
मोड़ा
गया
है
फूल
इक
गुल
दान
से
तोड़ा
गया
है
इश्क़
की
राहों
का
मुझ
को
क्या
पता
है
बीच
रस्ते
में
मुझे
छोड़ा
गया
है
मन
किसी
शीशे
सरीखा
हो
चला
है
दिख
ही
जाता
है
कहाँ
जोड़ा
गया
है
दूर
जाने
की
कही
थी
बात
उस
ने
रह
गया
थोड़ा
यहाँ
थोड़ा
गया
है
दिल
उसी
को
चाहता
है
टूट
कर
के
जिस
के
हाथों
बारहा
तोड़ा
गया
है
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Deepali Agarwal
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सज़ा
देना
है
तो
ऐसी
सज़ा
दे
किसी
से
इश्क़
करना
ही
सिखा
दे
मुझे
फिर
कुछ
दुआएँ
माँगनी
हैं
उफ़ुक़
से
फिर
कोई
तारा
गिरा
दे
वो
तुझ
को
आज़माना
चाहता
है
तू
अपने
सब्र
से
उस
को
हरा
दे
अगर
जाना
है
तो
जाए
वो
लेकिन
सबब
तो
छोड़
जाने
का
बता
दे
बनाऊँ
कोई
तो
ऐसी
ख़बर
में
ख़बर
उस
को
जो
अंदर
तक
हिला
दे
बस
इतनी
रौशनी
की
आरज़ू
है
जो
मेरे
साए
से
मुझ
को
मिला
दे
मैं
ख़ुद
से
बात
जी
भर
कर
सकूँ
बस
मुझे
इतनी
हवा
इतनी
फ़ज़ा
दे
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Deepali Agarwal
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