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Deepali Agarwal
saza dena hai to aisi saza de
saza dena hai to aisi saza de | सज़ा देना है तो ऐसी सज़ा दे
- Deepali Agarwal
सज़ा
देना
है
तो
ऐसी
सज़ा
दे
किसी
से
इश्क़
करना
ही
सिखा
दे
मुझे
फिर
कुछ
दुआएँ
माँगनी
हैं
उफ़ुक़
से
फिर
कोई
तारा
गिरा
दे
वो
तुझ
को
आज़माना
चाहता
है
तू
अपने
सब्र
से
उस
को
हरा
दे
अगर
जाना
है
तो
जाए
वो
लेकिन
सबब
तो
छोड़
जाने
का
बता
दे
बनाऊँ
कोई
तो
ऐसी
ख़बर
में
ख़बर
उस
को
जो
अंदर
तक
हिला
दे
बस
इतनी
रौशनी
की
आरज़ू
है
जो
मेरे
साए
से
मुझ
को
मिला
दे
मैं
ख़ुद
से
बात
जी
भर
कर
सकूँ
बस
मुझे
इतनी
हवा
इतनी
फ़ज़ा
दे
- Deepali Agarwal
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सुखा
ली
सबने
ही
आँखें
हवा
ए
ज़िन्दगी
से
यहाँ
अब
भी
वही
रोना
रुलाना
चल
रहा
है
Farhat Ehsaas
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रो
रहा
था
गोद
में
अम्माँ
की
इक
तिफ़्ल-ए-हसीं
इस
तरह
पलकों
पे
आँसू
हो
रहे
थे
बे-क़रार
जैसे
दीवाली
की
शब
हल्की
हवा
के
सामने
गाँव
की
नीची
मुंडेरों
पर
चराग़ों
की
क़तार
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Ehsan Danish
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क्यूँ
परेशाँ
हो
अब
सवालों
पे
धूल
तो
आ
गई
है
बालों
पे
हैं
रकीबों
के
तोहफ़े
साहब
दाँतों
के
सब
निशान
गालों
पे
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A R Sahil "Aleeg"
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दिल
की
चोटों
ने
कभी
चैन
से
रहने
न
दिया
जब
चली
सर्द
हवा
मैं
ने
तुझे
याद
किया
Josh Malihabadi
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बहुत
सी
कश्तियाँ
डूबी
जहाँ
पर
हवा
की
साजि़शें
गहरी
बहुत
थी
Umesh Maurya
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जहाँ
सारे
हवा
बनने
की
कोशिश
कर
रहे
थे
वहाँ
भी
हम
दिया
बनने
की
कोशिश
कर
रहे
थे
Abbas Qamar
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दिया
बुझ
जाए
तो
अचरज
नहीं
है
हवा
का
रुख
बदलता
जा
रहा
है
Atul K Rai
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ऊपर
उठती
हुई
एक
गर्म
हवा
है
मिरा
दर्द
मेरा
लहजा
कभी
फ़रियाद
नहीं
हो
सकता
Farhat Ehsaas
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इसे
तो
वक़्त
की
आब-ओ-हवा
ही
ठीक
कर
देगी
मियाँ
नासूर
होते
ज़ख़्म
सहलाया
नहीं
करते
shaan manral
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कमरे
में
फैलता
रहा
सिगरेट
का
धुआँ
मैं
बंद
खिड़कियों
की
तरफ़
देखता
रहा
Kafeel Aazar Amrohvi
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इश्क़
का
पन्ना
कहीं
मोड़ा
गया
है
फूल
इक
गुल
दान
से
तोड़ा
गया
है
इश्क़
की
राहों
का
मुझ
को
क्या
पता
है
बीच
रस्ते
में
मुझे
छोड़ा
गया
है
मन
किसी
शीशे
सरीखा
हो
चला
है
दिख
ही
जाता
है
कहाँ
जोड़ा
गया
है
दूर
जाने
की
कही
थी
बात
उस
ने
रह
गया
थोड़ा
यहाँ
थोड़ा
गया
है
दिल
उसी
को
चाहता
है
टूट
कर
के
जिस
के
हाथों
बारहा
तोड़ा
गया
है
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Deepali Agarwal
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बस
अब
दुनिया
से
पर्दा
चाहती
हूँ
में
सब
से
दूर
रहना
चाहती
हूँ
सितारों
की
तरह
या
गुल
के
जैसे
जवानी
में
ही
मरना
चाहती
हूँ
वो
एक
तस्वीर
जो
बनती
नहीं
है
उसी
में
रंग
भरना
चाहती
हूँ
किताबों
को
उठा
कर
गोद
में
यूँँ
मैं
कोई
शे'र
कहना
चाहती
हूँ
मुझे
भी
इल्म
है
दुनिया
का
सारा
मैं
धीमी
मौत
मरना
चाहती
हूँ
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Deepali Agarwal
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