har ik lab par KHamoshii ki sadaa thii | हर इक लब पर ख़मोशी की सदा थी

  - Deepak Qamar
हरइकलबपरख़मोशीकीसदाथी
दु'आओंमेंबदलतीसीहवाथी
कुशादाफैलतेआँगनदिलोंके
सभीकेवास्तेघरमेंजगहथी
जिसेसमझेहुएथेरौशनीहम
किसीमाँकीपरीजैसीदु'आथी
जोबच्चीखेलतीथीनंगेपैरों
वोपहलीरुतकीहीजैसेघटाथी
रतनजानाथाजिसकोमंथनोंका
घड़ीवोज़िंदगीभरकीसज़ाथी
भँवरथेदाएरोंकेआसमाँमें
येगर्दिशएकनुक़्तेकीख़ताथी
  - Deepak Qamar
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