ek rehzan ko ameer-e-kaarwaan samjha tha main | एक रहज़न को अमीर-ए-कारवाँ समझा था मैं

  - Davarka Das Shola
एकरहज़नकोअमीर-ए-कारवाँसमझाथामैं
अपनीबद-बख़्तीकोमंज़िलकानिशाँसमझाथामैं
तेरीमा'सूमीकेसदक़ेमेरीमहरूमीकीख़ैर
कितुझकोसूरत-ए-आराम-ए-जाँसमझाथामैं
दुश्मन-ए-दिलदुश्मन-ए-दींदुश्मन-ए-होश-ओ-हवासे
हाएकिसना-मेहरबाँकोमेहरबाँसमझाथामैं
दोस्तकादरगयातोख़ुद-बख़ुदझुकनेलगी
जिसजबींकोबे-नियाज़-ए-आस्ताँसमझाथामैं
क़ाफ़िलेकाक़ाफ़िलाहीराहमेंगुमकरदिया
तुझकोतोज़ालिमदलील-ए-रह-रवाँसमझाथामैं
मेरेदिलमेंकेबैठेऔरयहींकेहोगए
आपकोतोयूसुफ़-ए-बे-कारवाँसमझाथामैं
इकदरोग़-ए-मस्लहत-आमेज़थातेरासुलूक
येहक़ीक़तथीमगरयेभीकहाँसमझाथामैं
ज़िंदगीइनआ'म-ए-क़ुदरतहीसहीलेकिनइसे
क्याग़लतसमझाअगरयार-ए-गराँसमझाथामैं
फेरथाक़िस्मतकावोचक्करथामेरेपाँवका
जिसको'शो'ला'गर्दिश-ए-हफ़्त-आसमाँसमझाथामैं
  - Davarka Das Shola
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