phir uthi chashm-e-fusoon-saaz KHuda KHair kare | फिर उठी चश्म-ए-फ़ुसूँ-साज़ ख़ुदा ख़ैर करे

  - Daud Naseeb
फिरउठीचश्म-ए-फ़ुसूँ-साज़ख़ुदाख़ैरकरे
दिलहैफिरग़र्क़-ए-मय-ए-नाज़ख़ुदाख़ैरकरे
बर्क़चमकीहैब-सद-नाज़ख़ुदाख़ैरकरे
फिरनशेमनकाहैआग़ाज़ख़ुदाख़ैरकरे
दिलकेबसमेंथाछुपायाबहुतउसनेलेकिन
दस्त-ए-मिज़्गाँमेंहैअबराज़ख़ुदाख़ैरकरे
कोईआताहैपस-ए-क़ाफ़िला-ए-फ़स्ल-ए-बहार
फिरहैज़ंजीरकीआवाज़ख़ुदाख़ैरकरे
बर्क़कीज़दमेंगुलिस्ताँतोनहींहैलेकिन
गुलसेहैआगकीपरवाज़ख़ुदाख़ैरकरे
दिलकीधड़कनथेजोकलआजवहीदीवाने
होगएदूरकीआवाज़ख़ुदाख़ैरकरे
जानतेहैंकिबदलतीनहींतक़दीर'नसीब'
वक़्तऔरमहरम-ओ-हम-राज़ख़ुदाख़ैरकरे
  - Daud Naseeb
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