ho ke 'aashiq jaan marne se chur | हो के 'आशिक़ जान मरने से चुराए किस लिए

  - Dattatriya Kaifi
होके'आशिक़जानमरनेसेचुराएकिसलिए
मर्द-ए-मैदाँजोहोमैदाँमेंआएकिसलिए
जोदिल-ओ-ईमाँदींनज़्रउनबुतोंकोदेखकर
या-ख़ुदावोलोगइसदुनियामेंआएकिसलिए
हैयेअंदाज़-ए-हयाऔरतर्ज़-ए-तम्कींक्यूँँनहीं
जोहोवेचोरवोआँखेंचुराएकिसलिए
देखिएकिसजन्नतीकेआजखुलतेहैंनसीब
तेग़क्यूँँतोलेहैंयेचिल्लेचढ़ाएकिसलिए
उँगलियाँअपनेपरउठवानीहोंमंज़ूरतो
वोकिसीकोआममहफ़िलसेउठाएकिसलिए
उसकेपेच-ओ-ख़मसेजीते-जीनिकलनाहैमुहाल
हज़रत-ए-'कैफ़ी'तुमइसकूचेमेंआएकिसलिए
  - Dattatriya Kaifi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy