jazba-e-dil ko amal men kabhi laao to sahi | जज़्बा-ए-दिल को अमल में कभी लाओ तो सही

  - Darshan Singh
जज़्बा-ए-दिलकोअमलमेंकभीलाओतोसही
अपनीमंज़िलकीतरफ़पाँवबढ़ाओतोसही
ज़िंदगीवोजोहरीफ़-ए-ग़म-ए-अय्यामरहे
दिलशिकस्ताहैतोक्यासाज़उठाओतोसही
जागउट्ठेगीयेसोईहुईदुनियालेकिन
पहलेख़्वाबीदातमन्नाकोजगाओतोसही
फूलहीफूलहैंकहतेहोजिन्हेंतुमकाँटे
मेरीदुनिया-ए-जुनूँमेंकभीआओतोसही
तुम्हेंआबादनज़रआएगीउजड़ीदुनिया
दिलकीदुनियाकोमोहब्बतसेबसाओतोसही
ज़िंदगीफिरसेजवाँफिरसेहसींहोजाए
उनकीआँखोंसेज़राआँखमिलाओतोसही
करतेफिरतेहोअँधेरेकीशिकायत'दर्शन'
दिलकीदुनियामेंकोईदीपजलाओतोसही
  - Darshan Singh
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