jaan ko khatra kabhi eimaan ko | जान को ख़तरा कभी ईमान को

  - Darshan Dayal Parwaz
जानकोख़तराकभीईमानको
कोईसमझाएदिल-ए-नादानको
क्यूँकरेजन्नतकीकोईआरज़ू
ज़िंदगीप्यारीहैहरइंसानको
भूलजाओदोस्तोंकीबे-रुख़ी
यादरक्खोग़ैरकेएहसानको
हमकिसीक़ाबिलनहींइसउम्रमें
अबकोईख़तरानहींईमानको
इतनीतो'पर्वाज़'मेंतौफ़ीक़है
मातदेसकताहैयेशैतानको
  - Darshan Dayal Parwaz
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