gair se hi kyuuñ gila-shikwa rahe | ग़ैर से ही क्यूँ गिला-शिकवा रहे

  - Darshan Dayal Parwaz
ग़ैरसेहीक्यूँगिला-शिकवारहे
मुश्किलोंमेंअपनाकबअपनारहे
रूठनेकेवक़्तयेरक्खोख़याल
लौटकरआनेकाकुछरस्तारहे
चाहेकुछभीहोत'अल्लुक़अर्शसे
फ़र्शसेइंसानकारिश्तारहे
हरकिसीकेदिलमेंहोयेआरज़ू
दोस्तोंसेक़दमिराऊँचारहे
झूटावा'दाकरनेकोसमझोगुनाह
चाहेहालतकितनीभीख़स्तारहे
पीरीमेंकरनेलगेहैंहुज्जतें
उम्रभर'पर्वाज़'बे-परवारहे
  - Darshan Dayal Parwaz
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