aaj ke maahol men insaaniyat badnaam hai | आज के माहौल में इंसानियत बदनाम है

  - Daood Mohsin
आजकेमाहौलमेंइंसानियतबदनामहै
येइनाद-ए-बाहमीकाहीफ़क़तअंजामहै
हक़-शनासीकाचलनहममेंनहींबाक़ीरहा
सुब्हअपनीपुर-अलमहैपुर-ख़तरहरशामहै
हैफ़बर्बादी-ए-गुलशनअपनेहीहाथोंहुई
मुफ़्तमेंबाद-ए-ख़िज़ाँकेसरपेक्यूँँइल्ज़ामहै
धुँदलीधुँदलीसीफ़ज़ाहैमेहरऔरइख़्लासकी
अबरिफ़ाक़तआश्तीऔरदोस्तीगुमनामहै
तपतेसहरासेतोबचकरगएथेहममगर
अबक़दमकैसेबढ़ाएँपुर-ख़तरहर-गामहै
क्यागिरानीऔरअर्ज़ानीकीहमबातेंकरें
पानीमहँगाहैयहाँऔरख़ूनसस्तेदामहै
बापसेबच्चे'मोहसिन'मुन्हरिफ़होनेलगे
तर्बियतऔरइल्मकेफ़ुक़्दानकाअंजामहै
  - Daood Mohsin
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