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Parshuram Chauhan
greeshma ki sookhi nadi ka tat hooñ main
greeshma ki sookhi nadi ka tat hooñ main | ग्रीष्म की सूखी नदी का तट हूँ मैं
- Parshuram Chauhan
ग्रीष्म
की
सूखी
नदी
का
तट
हूँ
मैं
अब
तलक
प्यासा
रहा
पनघट
हूँ
मैंँ
एक
पल
आँखें
जरा
तुम
मूँद
लो
दूर
से
आती
हुई
आहट
हूँ
मैं
इन
मुखौटों
को
उतारूँगा
अभी
तुमने
पहचाना
नहीं
वो
नट
हूँ
मैं
देखता
हूँ
मैं
समय
की
धार
को
मौन
में
ठहरा
नदी
का
पट
हूँ
मैं
ये
धुआँ
ये
धुंध
है
लपटें
वही
ख़ाक
पर
बैठा
हुआ
मरघट
हूँ
मैं
- Parshuram Chauhan
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हमने
तुझ
पे
छोड़
दिया
है
कश्ती,
दरिया,
भँवर,
किनारा
Siddharth Saaz
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आँख
आँसू
को
ऐसे
रस्ता
देती
है
जैसे
रेत
गुज़रने
दरिया
देती
है
कोई
भी
उसको
जीत
नहीं
पाया
अब
तक
वैसे
वो
हर
एक
को
मौक़ा
देती
है
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Kafeel Rana
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चाँद
भी
हैरान
दरिया
भी
परेशानी
में
है
अक्स
किस
का
है
कि
इतनी
रौशनी
पानी
में
है
Farhat Ehsaas
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तिरे
एहसास
में
डूबा
हुआ
मैं
कभी
सहरा
कभी
दरिया
हुआ
मैं
Siraj Faisal Khan
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इस
नदी
की
धार
में
ठंडी
हवा
आती
तो
है
नाव
जर्जर
ही
सही,
लहरों
से
टकराती
तो
है
Dushyant Kumar
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चाँद
चेहरा
ज़ुल्फ़
दरिया
बात
ख़ुशबू
दिल
चमन
इक
तुम्हें
दे
कर
ख़ुदा
ने
दे
दिया
क्या
क्या
मुझे
Bashir Badr
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नदी
को
कोसते
हैं
सब
किसी
के
डूब
जाने
पर
नदी
में
डूबते
को
पर
कोई
तिनका
नहीं
देता
Alankrat Srivastava
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आपने
मुझको
डुबोया
है
किसी
और
जगह
इतनी
गहराई
कहाँ
होती
है
दरिया
में
Tehzeeb Hafi
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बातचीत
में
आला
हो
बस
ठीक
न
हो
फ़ाइदा
क्या
महबूब
अगर
बारीक
न
हो
हम
तेरी
क़ुर्बत
में
अक्सर
सोचते
हैं
दरिया
खेत
के
इतना
भी
नज़दीक
न
हो
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Khurram Afaq
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मंज़र
बना
हुआ
हूँ
नज़ारे
के
साथ
मैं
कितनी
नज़र
मिलाऊँ
सितारे
के
साथ
मैं
दरिया
से
एक
घूँट
उठाने
के
वास्ते
भागा
हूँ
कितनी
दूर
किनारे
के
साथ
मैं
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Khalid Sajjad
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ग्रीष्म
की
सूखी
नदी
का
तट
हूँ
मैं
अब
तलक
प्यासा
रहा
पनघट
हूँ
मैंँ
एक
पल
आँखें
जरा
तुम
मुंद
लो
दूर
से
आती
हुई
आहट
हूँ
मैं
इन
मुखौटों
को
उतारूंँगा
अभी
तुमने
पहचाना
नहीं
वो
नट
हूँ
मैं
देखता
हूँ
मैं
समय
की
धार
को
मौन
में
ठहरा
नदी
का
पट
हूँ
मैं
ये
धुआँ
ये
धुंद
है
लपटे
वही
ख़ाक
पर
बैठा
हुआ
मड़घट
हूँ
मैं
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Parshuram Chauhan
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