greeshma ki sookhi nadi ka tat hooñ main | ग्रीष्म की सूखी नदी का तट हूँ मैं

  - Parshuram Chauhan
ग्रीष्मकीसूखीनदीकातटहूँमैं
अबतलकप्यासारहापनघटहूँमैंँ
एकपलआँखेंजरातुममूँदलो
दूरसेआतीहुईआहटहूँमैं
इनमुखौटोंकोउतारूँगाअभी
तुमनेपहचानानहींवोनटहूँमैं
देखताहूँमैंसमयकीधारको
मौनमेंठहरानदीकापटहूँमैं
येधुआँयेधुंधहैलपटेंवही
ख़ाकपरबैठाहुआमरघटहूँमैं
  - Parshuram Chauhan
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