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Parshuram Chauhan
greeshma ki sookhi nadi ka tat hooñ main
greeshma ki sookhi nadi ka tat hooñ main | ग्रीष्म की सूखी नदी का तट हूँ मैं
- Parshuram Chauhan
ग्रीष्म
की
सूखी
नदी
का
तट
हूँ
मैं
अब
तलक
प्यासा
रहा
पनघट
हूँ
मैंँ
एक
पल
आँखें
जरा
तुम
मुंद
लो
दूर
से
आती
हुई
आहट
हूँ
मैं
इन
मुखौटों
को
उतारूंँगा
अभी
तुमने
पहचाना
नहीं
वो
नट
हूँ
मैं
देखता
हूँ
मैं
समय
की
धार
को
मौन
में
ठहरा
नदी
का
पट
हूँ
मैं
ये
धुआँ
ये
धुंद
है
लपटे
वही
ख़ाक
पर
बैठा
हुआ
मड़घट
हूँ
मैं
- Parshuram Chauhan
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बला
की
ख़ूब-सूरत
वो
उसे
ही
देख
जीता
हूँ
मुझे
उसकी
ज़रूरत
है,
न
मैं
उसका
चहीता
हूँ
कभी
उसको
परेशानी
मिरे
सिगरेट
से
होती
थी
उसे
बोलो
अभी
कोई
कि
मैं
दारू
भी
पीता
हूँ
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Deepankar
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छत
पे
सिगरेट
ले
के
बैठा
है
चाँद
भी
बेक़रार
है
शायद
Satya Prakash Soni
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रिश्तों
को
जब
धूप
दिखाई
जाती
है
सिगरेट
से
सिगरेट
सुलगाई
जाती
है
Ankit Gautam
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बुरा
मनाया
था
हर
आहट
हर
सरगोशी
का
सोचो
कितना
ध्यान
रखा
उसने
ख़ामोशी
का
तुम
इसका
नुक़सान
बताती
अच्छी
लगती
हो
वरना
हम
को
शौक़
नहीं
है
सिगरेट-नोशी
का
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Khurram Afaq
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कमरे
में
सिगरेटों
का
धुआँ
और
तेरी
महक
जैसे
शदीद
धुँध
में
बाग़ों
की
सैर
हो
Umair Najmi
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हमारी
आख़िरी
सिगरेट
थी
ये
अरे
दुनिया
जो
तुझ
पे
ग़ुस्से
में
हमने
अभी
जला
ली
है
Swapnil Tiwari
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ये
हवा
सारे
चराग़ों
को
उड़ा
ले
जाएगी
रात
ढलने
तक
यहाँ
सब
कुछ
धुआँ
हो
जाएगा
Naseer Turabi
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शाम
भी
थी
धुआँ
धुआँ
हुस्न
भी
था
उदास
उदास
दिल
को
कई
कहानियाँ
याद
सी
आ
के
रह
गईं
Firaq Gorakhpuri
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बे-सबब
मरने
से
अच्छा
है
कि
हो
कोई
सबब
दोस्तों
सिगरेट
पियो
मय-ख़्वारियाँ
करते
रहो
Ameer Imam
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कम
से
कम
मैंने
छुपा
ली
देख
कर
सिगरेट
तुम्हें
और
इस
लड़के
से
तुमको
कितनी
इज़्ज़त
चाहिए
Nadeem Shaad
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ग्रीष्म
की
सूखी
नदी
का
तट
हूँ
मैं
अब
तलक
प्यासा
रहा
पनघट
हूँ
मैंँ
एक
पल
आँखें
जरा
तुम
मूँद
लो
दूर
से
आती
हुई
आहट
हूँ
मैं
इन
मुखौटों
को
उतारूँगा
अभी
तुमने
पहचाना
नहीं
वो
नट
हूँ
मैं
देखता
हूँ
मैं
समय
की
धार
को
मौन
में
ठहरा
नदी
का
पट
हूँ
मैं
ये
धुआँ
ये
धुंध
है
लपटें
वही
ख़ाक
पर
बैठा
हुआ
मरघट
हूँ
मैं
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Parshuram Chauhan
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