ghadi-bhar khalvaton ko aanch de kar bujh gaya suraj | घड़ी-भर ख़ल्वतों को आँच दे कर बुझ गया सूरज

  - Chandrabhan Khayal
घड़ी-भरख़ल्वतोंकोआँचदेकरबुझगयासूरज
किसीकेदर्दकीलयपरकहाँतकनाचतासूरज
निगाहोंमेंनएअंदाज़सेफिररौशनीहोगी
जबउगआएगाज़ेहनोंमेंहमारेइकनयासूरज
ज़मींकाकर्बऔज-ए-आसमाँपरभीझलकउट्ठा
नशेब-ए-कोहपरजुरअतसेजबजबमिलासूरज
हमारेघरकेआँगनमेंसितारेबुझगएलाखों
हमारीख़्वाबगाहोंमेंचमकासुब्हकासूरज
शबिस्ताँ-दर-शबिस्ताँज़ुल्मतोंकीएकयूरिशहै
हरइकदामनसेलिपटाहैलरज़ताहाँफतासूरज
हमारेबाम-ए-दरसेआजभीलिपटीहैतारीकी
हमारेआसमानोंमेंबताओकबउगासूरज
सुनादीदास्ताँअपनीजोहमनेबे-ज़बाँहोकर
मिसाल-ए-क़तराशबनमबिखरकररोपड़ासूरज
  - Chandrabhan Khayal
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