sirf ik hadd-e-nazar ko aasmaañ samjha tha main | सिर्फ़ इक हद्द-ए-नज़र को आसमाँ समझा था मैं

  - Chandrabhan Khayal
सिर्फ़इकहद्द-ए-नज़रकोआसमाँसमझाथामैं
आसमानोंकीहक़ीक़तकोकहाँसमझाथामैं
ख़ुदमिलाऔरमिलकेवोअपनापताभीदेगया
जबकिसारीकाविशोंकोराएगाँसमझाथामैं
ज़िंदगीकारंगपहचानागयाजीनेकेबा'द
दूरसेउसरंगकोउड़ताधुआँसमझाथामैं
मेहरबानोंसेहमेशाहीरहेशिकवेगले
औरहरना-मेहरबाँकोमेहरबाँसमझाथामैं
देरहाथावोसदाएँऔरमैंख़ामोशथा
कश्मकशकीउसघड़ीकोइम्तिहाँसमझाथामैं
होगयाहूँक़त्लबे-रहमीसेउनकेसामने
हैफ़जिनलोगोंकोअपनापासबाँसमझाथामैं
पाससेदेखातोजानाकिसक़दरमग़्मूमहैं
अन-गिनतचेहरेकिजिनकोशादमाँसमझाथामैं
  - Chandrabhan Khayal
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