k | कभी जो शब की सियाही से ना-गहाँ गुज़रे

  - Chandrabhan Khayal
कभीजोशबकीसियाहीसेना-गहाँगुज़रे
हमअहल-ए-ज़र्फ़हरइकसोचपरगराँगुज़रे
निगाह-ओ-दिलसेमिटादेंजोतिश्नगीकाअज़ाब
वोआबशारकेधारेअभीकहाँगुज़रे
ग़मआफ़रींथामुसलसलसुकूत-ए-शहर-ए-हबीब
हमइसगलीसेमगरफिरभीशादमाँगुज़रे
शिकस्तगीकीतिलिस्मीफ़ज़ानईतोनहीं
यहाँतोऐसेकईदौरइम्तिहाँगुज़रे
नज़रमेंशोख़शबीहेंलिएहुएहैसहर
अभीकोईइधरसेधुआँधुआँगुज़रे
तमामकोहकशाकशथामेरेसरपे'ख़याल'
अगरचेऔरभीदुनियामेंसख़्तजाँगुज़रे
  - Chandrabhan Khayal
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy