bazaar-e-jihaalat men sukhun bech raha hooñ | बाज़ार-ए-जिहालत में सुख़न बेच रहा हूँ

  - Chander Wahid
बाज़ार-ए-जिहालतमेंसुख़नबेचरहाहूँ
येगीतयेनग़्मातयेफ़नबेचरहाहूँ
हैकोईख़रीदारतोआवाज़लगाए
रोटीकेएवज़शेर-ओ-सुख़नबेचरहाहूँ
क्यादामलगातेहोचलोतुमहीबताओ
सच्चाईकाअनमोलरतनबेचरहाहूँ
पुरखोंनेबनायाथाजिसेलाखजतनसे
तहज़ीब-ओ-अदबकावोभवनबेचरहाहूँ
तुमठीकहीकहतेथेतिजारतनहींआसाँ
अबकौनख़रीदेजोसुख़नबेचरहाहूँ
  - Chander Wahid
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