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Brajnabh Pandey
main vo safar hooñ jo mukammal hi nahin
main vo safar hooñ jo mukammal hi nahin | मैं वो सफ़र हूँ जो मुकम्मल ही नहीं
- Brajnabh Pandey
मैं
वो
सफ़र
हूँ
जो
मुकम्मल
ही
नहीं
वो
शख़्स
आख़िर
छोड़
जाएगा
मुझे
- Brajnabh Pandey
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सितारे
और
क़िस्मत
देख
कर
घर
से
निकलते
हैं
जो
बुज़दिल
हैं
मुहूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
हमें
लेकिन
सफ़र
की
मुश्किलों
से
डर
नहीं
लगता
कि
हम
बच्चों
की
सूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
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Abrar Kashif
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सफ़र
में
जब
निकल
आए
हो
तो
इतनी
शिकायत
क्यूँ
सड़क
थोड़ी
बहुत
तो
बीच
में
तिरछी
निकलती
है
Pratap Somvanshi
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मैं
लौटने
के
इरादे
से
जा
रहा
हूँ
मगर
सफ़र
सफ़र
है
मिरा
इंतिज़ार
मत
करना
Sahil Sahri Nainitali
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धोखा
है
इक
फ़रेब
है
मंज़िल
का
हर
ख़याल
सच
पूछिए
तो
सारा
सफ़र
वापसी
का
है
Rajesh Reddy
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यही
तो
एक
तमन्ना
है
इस
मुसाफ़िर
की
जो
तुम
नहीं
तो
सफ़र
में
तुम्हारा
प्यार
चले
Aalok Shrivastav
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रास्ता
सोचते
रहने
से
किधर
बनता
है
सर
में
सौदा
हो
तो
दीवार
में
दर
बनता
है
Jaleel 'Aali'
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मैं
अपने
आप
में
गहरा
उतर
गया
शायद
मिरे
सफ़र
से
अलग
हो
गई
रवानी
मिरी
Abbas Tabish
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ज़िंदगी
यूँँ
हुई
बसर
तन्हा
क़ाफ़िला
साथ
और
सफ़र
तन्हा
Gulzar
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फूल
से
लेकर
ये
धनिया
लाने
तक
के
इस
सफ़र
को
मुझको
तेरे
साथ
ही
तय
करने
की
ख़्वाहिश
है
पगली
Harsh saxena
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सिवा
इसके
कुछ
अच्छा
ही
नहीं
लगता
है
शामों
में
सफ़र
कैसा
भी
हो
घर
को
परिंदे
लौट
जाते
हैं
Aarush Sarkaar
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मैं
सोचता
हूँ
इस
जहाँ
में
क्या
ही
दूँगा
जाँ
तुझे
अपना
बना
तो
लूँ
मगर
कैसे
रखूँगा
जाँ
तुझे
तू
पूछती
है
मुझ
सेे
अक्सर
मेरे
दिल
में
कौन
हैं
हामी
भरेगी
वा'दा
कर
तो
सच
कहूँगा
जाँ
तुझे
बस
वो
बदन
से
आ
लिपट
जाए
मेरे
इस
वास्ते
अक्सर
मैं
कहता
हूँ
उसे
ये
छोड़
दूँगा
जाँ
तुझे
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Brajnabh Pandey
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मैं
समझ
ही
गया
कि
मेरा
ग़म
तुझको
अब
जाँ
समझ
नहीं
आता
Brajnabh Pandey
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दो
पल
की
बातों
से
हुआ
दिल
इतना
ख़ुश
ये
हाल
यारों
आशिकों
का
होता
है
Brajnabh Pandey
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ऐसा
तो
इस
ज़िंदगी
में
मैं
तेरा
क्या
खा
गया
जाँ
के
तेरा
इश्क़
इन
आँखों
का
दरिया
खा
गया
जिसको
कहता
रहता
था
दुनिया
मेरी
दुनिया
मेरी
ब्रज
वही
आख़िर
में
मेरी
सारी
दुनिया
खा
गया
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Brajnabh Pandey
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है
मुझे
तेरे
बदन
की
चाह
कुछ
इस
तरह
जाना
मौत
ही
को
चाहता
हो
इक
मरीज़
ए
इश्क़
जैसे
Brajnabh Pandey
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