vo soorat gard-e-gham men chhup gaii ho | वो सूरत गर्द-ए-ग़म में छुप गई हो

  - Bashir Badr
वोसूरतगर्द-ए-ग़ममेंछुपगईहो
बहुतमुमकिनयेवोहीआदमीहो
मैंठहराआबशार-ए-शहर-ए-पुर-फ़न
घनेजंगलकीतुमबहतीनदीहो
मिरीआँखोंमेंरेगिस्ताँबसेहैं
कोईऐसेमेंसावनकीझड़ीहो
बहुतमसरूफ़हैअंगुश्त-ए-नग़्मा
मगरतुमतोअभीतकबाँसुरीहो
दियाजोबुझचुकाहैफिरजलाना
बहुतमहसूसजबमेरीकमीहो
येशबजैसेकोईबे-माँकीबच्ची
अकेलेरोतेरोतेसोगईहो
वोदरियामेंनहानाचाँदनीका
किचाँदीजैसेघुलकरबहरहीहो
कहानीकहनेवालेकहरहेहैं
मगरजानेवहीजिसपरपड़ीहो
मियाँ!दीवानकामतरो'बडालो
पढ़ोकोईग़ज़लजोवाक़ईहो
ग़ज़लवोमतसुनानाहमकोशाएर
जोबेहदसामईंमेंचलचुकीहो
  - Bashir Badr
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