zakham-e-jigar dikhaane ko taiyaar ham nahin | ज़ख़्म-ए-जिगर दिखाने को तैयार हम नहीं

  - Dharmesh bashar
ज़ख़्म-ए-जिगरदिखानेकोतैयारहमनहीं
तुमहोअगरतबीबतोबीमारहमनहीं
परिवारसेमिलीहैविरासतमेंजोहमें
नीलामकरनेवालेवोदस्तारहमनहीं
कैसेक़बीलालुटगयाहमसेेपूछिए
कहतोदियाक़बीलेकेसरदारहमनहीं
ज़ालिमकोज़ुल्मढानेसेमतलबहैढाएगा
तुमचुपरहोयाचीख़ोगुनहगारहमनहीं
हमबे-सबबतिरीसभीबातोंमेंगए
तक़दीरहैतेरीकिसमझदारहमनहीं
कैसीअजीबभूकहैदौलतकीभूकभी
धनवानकहरहेहैंकिदातारहमनहीं
किरदारअपनाआख़िरीदमतकनिभाएँगे
शाइरहैंहमअगरचेअदाकारहमनहीं
सिक्कोंमेंतौलदेतेहैंअपनीक़लमकोजो
जानो'बशर'किऐसेक़लमकारहमनहीं
  - Dharmesh bashar
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