ishq ki jab bhi kabhi talqeen ki | इश्क़ की जब भी कभी तल्क़ीन की

  - Dharmesh bashar
इश्क़कीजबभीकभीतल्क़ीनकी
उसनेहरइकलफ़्ज़परआमीनकी
इसलिएभीदूरियोंसेदूरहूँ
दिलनहींसुनताकिसीबे-दीनकी
सरसराहटआस्तीनोंमेंहुई
नब्ज़यानीअबथमीहैबीनकी
इनबयाबानोंमेंआनाहैकिसे
बे-सबबतुमनेयेसबतज़ईनकी
औरतेरीदोस्तीकोक्याकहूँ
यारइसनेज़िंदगीरंगीनकी
जानताहैवोख़साराज़ीस्तका
जिसनेभीमाँबापकीतदफ़ीनकी
किसनेमाँगाहैवफ़ाओंकासिला
प्यारकीकिसने'बशर'तौहीनकी
  - Dharmesh bashar
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