tujh se roothe to kaii roz na KHud se bole | तुझ से रूठे तो कई रोज़ न ख़ुद से बोले

  - Dharmesh bashar
तुझसेरूठेतोकईरोज़ख़ुदसेबोले
बारहातेरीहीयादोंकेदरीचेखोले
तूभीख़ामोशहैतस्वीरभीतेरीख़ामोश
कोईतोबातकरेकोईतोहमसेेबोले
मेरीतख़’ईलमिरीज़ातसेआगेबढ़ी
तेरीआँखोंनेकईभेदजहाँकेखोले
मेरीतौफ़ीक़भीकमहैमिरीऔक़ातभीकम
क्याज़रूरीहैकिवोआँखमुझीकोतोले
आजकीराततोजीभरकेहमेंरोनाहैं
जिसकोसोनाहैबड़ेशौक़सेजाएसोले
हमनेतोरोज़हीमाँगीहैंदुआएँलेकिन
कभीहाथउठाएकभीलबखोले
ज़ौक़-ए-परवाज़हीकाफ़ीथाउड़ानोंकेलिए
कभीपंखयेखोलेइरादेतोले
मेरेबारेमेंभलामौतकीमंशाक्याहै
सोचतीहोगीवोआएमिराघूँघटखोले
लोगमुश्ताक़भीहैंगोश-बर-आवाज़भीहैं
क्यूँँ'बशर’ऐसेमेंअबकोईज़ुबाँकोखोले
  - Dharmesh bashar
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