aao guzare zamaane kii baatein karen | आओ गुज़रे ज़माने की बातें करें

  - Dharmesh bashar
आओगुज़रेज़मानेकीबातेंकरें
बारिशोंमेंनहानेकीबातेंकरें
नावकाग़ज़कीबैठेबनातेरहें
औरसैलाबआनेकीबातेंकरें
उसख़यालोंकेरंगींनगरसेकभी
लौटकरफिरआनेकीबातेंकरें
रातबिस्तरमेंतकिएसेसरकोदबा
आँसुओंकोछुपानेकीबातेंकरें
कुछकुछतोरहीवजहबिछड़ेजोहम
उसकोअबभूलजानेकीबातेंकरें
भूलजाओ'बशर'मिलनहींपाएहम
बसअधूरेफ़सानेकीबातेंकरें
  - Dharmesh bashar
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