ghar se bhi kuchh ghamon kii tawaanai le ke ja | घर से भी कुछ ग़मों की तवानाई ले के जा

  - Dharmesh bashar
घरसेभीकुछग़मोंकीतवानाईलेकेजा
परदेसजारहाहैतोतन्हाईलेकेजा
रातोंकीतीरगीडसेगीनिगाहको
हुस्न-ए-शब-ए-विसालकीअँगड़ाईलेकेजा
जिसअंजुमनमेंजुर्महैइज़हार-ए-मुद्द'आ
उसअंजुमनमेंजुर्रत-ए-गोयाईलेकेजा
ना-आश्नाहैतुझसेेतिराशहर-ए-आरज़ू
फ़ितरतमेंअपनीअंजुमनआराईलेकेजा
पर्दोंकीअंजुमनमेंनक़ाबोंकीबज़्ममें
जानाहीचाहताहैतोबीनाईलेकेजा
आँखोंमेंसब्ज़ा-ज़ारकामंज़रसमेटले
साँसोंमेंअपनेगाँवकीपुरवाईलेकेजा
अबहैयही'बशर'मिरासरमाया-ए-हयात
रुसवाईकामआएगीरुसवाईलेकेजा
  - Dharmesh bashar
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