shirkat--e-bazm se chahe koii inkaar na ho | शिरकत-ए-बज़्म से चाहे कोई इनकार न हो

  - Dharmesh bashar
शिरकत-ए-बज़्मसेचाहेकोईइनकारहो
कैसेआएँगेवोजबतकज़राइसरारहो
ज़िन्दगीऐसेमुसाफ़िरकीथकनहैजिसपर
इकघनेपेड़कासायाभीअसरदारहो
बेबसीआजकेइन्साँकीहैकुछयूँँगोया
नावतूफ़ाँमेंहोऔरहाथमेंपतवारहो
कहिएइसशहरमेंअबकौनसाघरहैऐसा
जिस
मेंआँगनतोहोपरबीचमेंदीवारहो
अक़्लसेवक़्तबदलसकताहैदानिश-मंदों
क्याहैशमशीर-ब-कफ़बढ़केअगरवारहो
इनदिनोंशहरमेंहैंऐसीहवाएँयारों
दिलयेकरताहैकिघरमेराहवादारहो
यूँँहैमशरूफ़'बशर'अबकितरसआताहै
अपनेबच्चेहीपहचानेजोइतवारहो
  - Dharmesh bashar
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