vo mauj ik maqaam se | वो मौज इक मक़ाम से

  - Balraj Komal
वोमौजइकमक़ामसे
उफ़ुक़कीसम्त
फैलतीचलीगई
वोएकदाएरेसे
सैकड़ोंहसीनदाएरोंमें
देखतेहीदेखतेबदलगई
हरएकदाएरेमेंआफ़्ताबथा
हरएकदाएरेमेंसुर्ख़ज़हरथा
हरएकदायराहयात-ए-जावेदाँ
हरएकदाएरेमेंमर्ग-ए-शादमाँ
वोएकथी
हज़ारसूरतोंमेंमेरेसामने
तुलूअ'जबहुई
तोमेराआसमानबनगई
नईअज़ीमलज़्ज़तोंकेदरमियाँ
मैंअपनेमुश्तइ'लमक़ामसे
उफ़ुक़कीसम्तफैलताचलागया
हिसार-ए-मर्गज़िंदगीकोरौंदताचलागया
  - Balraj Komal
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