kisi nashshe se beshtar to na tha | किसी नश्शे से बेशतर तो न था

  - Balraj Hairat
किसीनश्शेसेबेशतरतोथा
रिश्ता-ए-ग़मभीमो'तबरतोथा
मेरेअंजामउन्हेंफ़रेबदे
कम-बसरथामैंकम-नज़रतोथा
कमतोपहलेभीथेअहल-ए-जुनूँ
लेकिनअबतकजुनूँहुनरतोथा
अपनीहरख़ुद-सुपुर्दगीकीक़सम
मैंजहाँथावोमेराघरतोथा
हमथेराहेंतराशनेकेलिए
शामिलइसफ़र्ज़मेंसफ़रतोथा
साएलोगोंकेसरपेकिसनेकिए
दूरतकएकभीशजरतोथा
ख़ाकपरगिरकेमिटगयाआख़िर
अश्कफिरअश्कथागुहरतोथा
वादी-ए-मर्गक्यूँअदमठहरी
ज़िंदगीसेवहाँमफ़रतोथा
वक़्तकीबातहैमियाँ'हैरत'
दिललगानेमेंऐसाडरतोथा
  - Balraj Hairat
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