aql ke dushman bhi ham thehre dil ka bhi nuksaan kiya | अक़्ल के दुश्मन भी हम ठहरे दिल का भी नुक़सान किया

  - Balraj Hairat
अक़्लकेदुश्मनभीहमठहरेदिलकाभीनुक़सानकिया
ज़ौक़-ए-तलबकीआड़में'हैरत'नफ़्सनेक्याहैरानकिया
ख़ल्क़कियाहोगाआदमकोवाक़ईहज़रत-ए-यज़्दाँने
लेकिनउसकानामबताओजिसनेउसेइंसानकिया
रामथेमर्यादापुरुषोत्तमरामकीबातेंरहनेदो
औरबताओइसदुनियामेंकिसनेकिसकामानकिया
हमकुछभीतोनहींथेलेकिनआपायारबुरीशयहै
पहरोंअपनीयादमेंरोएजबभीतेराध्यानकिया
अबयेतकल्लुफ़भीदुनियामेंलोगकहाँफ़रमातेहैं
तूनेपूछाहालहमारायारबड़ाएहसानकिया
दिलतोइसीख़ातिरहोताहैक्यायेतुम्हेंमालूमथा
'हैरत'क्यूँबर्बादी-ए-दिलपरजीइतनाहलकानकिया
  - Balraj Hairat
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