KHud ko khu | ख़ुद को ख़ुदी का आइना दिखला रहा हूँ मैं

  - Baldev Raaj
ख़ुदकोख़ुदीकाआइनादिखलारहाहूँमैं
अपनाहरीफ़आपबनाजारहाहूँमैं
क़िस्मतकीपस्तियोंकीहदेंख़त्महोचुकीं
अबरिफ़अ'तोंकीसम्तउड़ाजारहाहूँमैं
नाकाम-ए-आरज़ूहूँमगरउफ़यक़ीन-ए-इश्क़
दानिस्ताफिरफ़रेब-ए-वफ़ाखारहाहूँ
मोहर-ए-सुकूत-ए-लबपेहैबहकेहुएक़दम
बे-ख़ुदीफिरआजकिधरजारहाहूँमैं
फिरदेखताहूँचेहरा-ए-माज़ीकेख़द्द-ओ-ख़ाल
साक़ीसँभालहोशमेंफिररहाहूँमैं
रुकजाएजिसकेशोरसेदश्त-ओ-जबलकीसाँस
उससैल-ए-रंज-ओ-ग़ममेंबहाजारहाहूँमैं
जानेकोहूँअहाता-ए-आलमसेदूर-तर
बसचंदरोज़तुमकोनज़ररहाहूँमैं
शम्स-ओ-क़मरहैंराहमेंज़र्रातकीतरह
किसकीतजल्लियोंमेंघिराजारहाहूँमैं
थाजोख़यालतेरीजफ़ाओंसेपेशतर
दिलकोउसीख़यालसेबहलारहाहूँमैं
बढ़बढ़के'राज'मेरेक़दमलेरहीहैमौत
किसज़िंदगीकीसम्तबढ़ाजारहाहूँमैं
  - Baldev Raaj
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