roodaad-e-shauq ye hai mirii mukhtasar tamaam | रूदाद-ए-शौक़ ये है मिरी मुख़्तसर तमाम

  - Bakhtiyar Ziya
रूदाद-ए-शौक़येहैमिरीमुख़्तसरतमाम
रानाइयोंमेंखोगयाज़ौक़-ए-नज़रतमाम
गुज़राहैगुल-बदनकोईमेरीतलाशमें
महकीहुईहैआजमिरीरहगुज़रतमाम
वोदिनभीक्याथेजबथीहवाओंसेगुफ़्तुगू
अबहमसेबातकरतेहैंदीवार-ओ-दरतमाम
ख़ुदअपनाएहतिसाबगवारानहींउन्हें
औरोंमेंऐबढूँडतेहैंदीदा-वरतमाम
तन्हाइयाँनसीबकाउनवानबनगईं
एकएककरकेछूटगएहम-सफ़रतमाम
होनेलगेहैंमेरीख़मोशीपेतब्सिरे
अबजानलेकेछोड़ेंगेयेचारा-गरतमाम
क्यासोचकरचलेथे'ज़िया'राह-ए-शौक़में
शायदहोसकेयेसफ़रउम्र-भरतमाम
  - Bakhtiyar Ziya
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