bikhere zulf rukh par kaun ye bala-e-baam aaya | बिखेरे ज़ुल्फ़ रुख़ पर कौन ये बाला-ए-बाम आया

  - Bakhtiyar Ziya
बिखेरेज़ुल्फ़रुख़परकौनयेबाला-ए-बामआया
ख़यालोंकीफ़ज़ामहकीबहारोंकापयामआया
मिज़ाज-ए-यारमेंजबभीख़याल-ए-इंतिक़ामआया
सर-ए-फ़िहरिस्तअपनाहीगुनहगारोंमेंनामआया
अजबहंगामादेखाहमनेसाक़ीतेरीमहफ़िलमें
कोईतिश्ना-दहनउट्ठाकोईछलकाकेजामआया
गिराँ-कोशीमेंअफ़राज़ीतन-आसानीमेंपामाली
मशक़्क़तसुरख़-रूउट्ठीतसाहुलज़ेर-ए-दामआया
ज़ुहूर-ए-सैर-चश्मीहीदलील-ए-कामरानीहै
मिरापिंदार-ए-ना-आसूदगीहीमेरेकामआया
येमिस्रादेदियाइक़बालकाकिसशोख़-फ़ितरतने
समंदफ़िक्रकेआगे'ज़िया'मुश्किलमक़ामआया
  - Bakhtiyar Ziya
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy