dard samjhe na koi dard ka darmaan samjhe | दर्द समझे न कोई दर्द का दरमाँ समझे

  - Bakhtiyar Ziya
दर्दसमझेकोईदर्दकादरमाँसमझे
लोगवहशतकोइलाज-ए-ग़म-ए-दौराँसमझे
दिलपेक्यागुज़रीअचानकतिरेजानेसे
इसनज़ाकतकोभलाक्याकोईमेहमाँसमझे
अर्श-ओ-कुर्सीसेपरेरखतेहैंजोलांगह-ए-फ़िक्र
मंज़र-ए-दहरकोहमरौज़न-ए-ज़िंदाँसमझे
वोभड़कतेहुएशो'लेथेनशेमनकेमिरे
दूरसेआपजिन्हेंसर्व-ए-चराग़ाँसमझे
यूँँभीहालातसेसमझौताकियाहैअक्सर
दुश्मन-ए-जाँकोभीहमअपनानिगहबाँसमझे
  - Bakhtiyar Ziya
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