aaj phir dasht koi aabla-pa maange hai | आज फिर दश्त कोई आबला-पा माँगे है

  - Bakhtiyar Ziya
आजफिरदश्तकोईआबला-पामाँगेहै
ख़ारभीताज़गी-ए-रंग-ए-हिनामाँगेहै
ज़ब्त-ए-ग़मदस्तरस-ए-आह-ए-रसामाँगेहै
येअँधेरातिरेआरिज़कीज़ियामाँगेहै
जाँ-दहीतिश्ना-लबीआबला-पाईबे-सूद
दश्त-ए-ग़ुर्बततोकुछइसकेभीसिवामाँगेहै
फुंकरहाहैग़म-ए-हस्तीसेवजूद-ए-इंसाँ
ज़िंदगीअबतिरेदामनकीहवामाँगेहै
आपचुपकेसेउसेज़हरकापियालादेदें
जोरिवायतसेबग़ावतकासिलामाँगेहै
चाँदसीनेसेलगाएहैमिरानक़्श-ए-क़दम
औरसूरजमिरीसाँसोंकीसदामाँगेहै
  - Bakhtiyar Ziya
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