shaane ki har zabaan se sune koi laaf-e-zulf | शाने की हर ज़बाँ से सुने कोई लाफ़-ए-ज़ुल्फ़

  - Bahadur Shah Zafar
शानेकीहरज़बाँसेसुनेकोईलाफ़-ए-ज़ुल्फ़
चीरेहैसीनारातकोयेमू-शिगाफ़-ए-ज़ुल्फ़
जिसतरहसेकिकाबेपेहैपोशिश-ए-सियाह
इसतरहइससनमकेहैरुख़परग़िलाफ़-ए-ज़ुल्फ़
बरहमहैइसक़दरजोमिरेदिलसेज़ुल्फ़-ए-यार
शामत-ज़दानेक्याकियाऐसाख़िलाफ़-ए-ज़ुल्फ़
मतलबकुफ़्रदींसेदैरहरमसेकाम
करताहैदिलतवाफ़-ए-इज़ारतवाफ़-ए-ज़ु़ल्फ़
नाफ़-ए-ग़ज़ाल-ए-चींहैकिहैनाफ़ा-ए-ततार
क्यूँँकरकहूँकिहैगिरह-ए-ज़ुल्फ़नाफ़-ए-ज़ुल्फ़
आपसमेंआजदस्त-ओ-गरेबाँहैरोज़शब
मेहर-वशज़रीकानहींमू-ए-बाफ़-ए-ज़ुल्फ़
कहताहैकोईजीमकोईलामज़ुल्फ़को
कहताहूँमैं'ज़फ़र'किमुसत्तहहैकाफ़-ए-ज़ुल्फ़
  - Bahadur Shah Zafar
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