kyunkar na khaaksaar rahen ahl-e-keen se door | क्यूँँकर न ख़ाकसार रहें अहल-ए-कीं से दूर

  - Bahadur Shah Zafar
क्यूँँकरख़ाकसाररहेंअहल-ए-कींसेदूर
देखोज़मींफ़लकसेफ़लकहैज़मींसेदूर
परवानावस्ल-ए-शम्अपेदेताहैअपनीजाँ
क्यूँँकररहेदिलउसकेरुख़-ए-आतिशींसेदूर
मज़मून-ए-वस्ल-व-हिज्रजोना
मेंमेंहैरक़म
हैहर्फ़भीकहींसेमिलेऔरकहींसेदूर
गोतीर-ए-बे-गुमाँहैमिरेपासपरअभी
जाएनिकलकेसीना-ए-चर्ख़-ए-बरींसेदूर
वोकौनहैकिजातेनहींआपजिसकेपास
लेकिनहमेशाभागतेहोतुमहमींसेदूर
हैरानहूँकिउसकेमुक़ाबिलहोआईना
जोपुर-ग़ुरूरखिंचताहैमाह-ए-मुबींसेदूर
याँतकअदूकापासहैउनकोकिबज़्ममें
वोबैठतेभीहैंतोमिरेहम-नशींसेदूर
मंज़ूरहोजोदीदतुझेदिलकीआँखसे
पहुँचेतिरीनज़रनिगह-ए-दूर-बींसेदूर
दुनिया-ए-दूँकीदेमोहब्बतख़ुदा'ज़फ़र'
इंसाँकोफेंकदेहैयेईमानदींसेदूर
  - Bahadur Shah Zafar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy