paan ki surkhi nahin lab par but-e-khoon-khwaar ke | पान की सुर्ख़ी नहीं लब पर बुत-ए-ख़ूँ-ख़्वार के

  - Bahadur Shah Zafar
पानकीसुर्ख़ीनहींलबपरबुत-ए-ख़ूँ-ख़्वारके
लगगयाहैख़ून-ए-आशिक़मुँहकोइसतलवारके
ख़ाल-ए-आरिज़देखलोहल्क़ेमेंज़ुल्फ़-ए-यारके
मार-ए-मोहरागरदेखाहोदहनमेंमारके
अंजुम-ए-ताबाँफ़लकपरजानतीहैजिसकोख़ल्क़
कुछशरारेहैंवोमेरीआह-ए-आतिश-बारके
तूबा-ए-जन्नतसेउसकोकामक्याहैहूर-वश
जोकिहैंआसूदासाएमेंतिरीदीवारके
पूछतेहोहालक्यामेराक़िमार-ए-इश्क़में
झाड़बैठाहाथमैंनक़्द-ए-दिल-ओ-दींहारके
येहुईतासीरइश्क़-ए-कोह-कनसेसंग-ए-आब
अश्कजारीअबतलकचश्मोंसेहैंकोहसारके
हैवोबे-वहदतकिजोसमझेहैकुफ़्रदींमेंफ़र्क़
रखतीहैतस्बीहरिश्तातारसेज़ुन्नारके
वादा-ए-दीदारजोठहराक़यामतपरतोयाँ
रोज़होतीहैक़यामतशौक़मेंदीदारके
होशियारीहैयहीकीजे'ज़फ़र'इससेहज़र
देखिएजिसकोनशेमेंबादा-ए-पिंदारके
  - Bahadur Shah Zafar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy