hai dil ko jo yaad aayi falak-e-peer kisi ki | है दिल को जो याद आई फ़लक-ए-पीर किसी की

  - Bahadur Shah Zafar
हैदिलकोजोयादआईफ़लक-ए-पीरकिसीकी
आँखोंकेतलेफिरतीहैतस्वीरकिसीकी
गिर्याभीहैनालाभीहैऔरआह-ओ-फ़ुग़ाँभी
परदिलमेंहुईउसकेतासीरकिसीकी
हाथआएहैक्याख़ाकतिरेख़ाक-ए-कफ़-ए-पा
जबतककिक़िस्मतमेंहोइक्सीरकिसीकी
यारोवोहैबिगड़ाहुआबातेंबनाओ
कुछपेशनहींजानेकीतक़रीरकिसीकी
नाज़ाँहोमुनइ'मकिजहाँतेरामहलहै
होवेगीयहाँपहलेभीता'मीरकिसीकी
मेरीगिरह-ए-दिलखुलीहैखुलेगी
जबतकखुलेज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीरकिसीकी
आताभीअगरहैतोवोफिरजाएहैउल्टा
जिसवक़्तउलटजाएहैतक़दीरकिसीकी
इसअबरूमिज़्गाँसे'ज़फ़र'तेज़ज़ियादा
ख़ंजरकिसीकाहैशमशीरकिसीकी
जोदिलसेउधरजाएनज़रदिलहोगिरफ़्तार
मुजरिमहोकोईऔरहोतक़्सीरकिसीकी
  - Bahadur Shah Zafar
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