ham ye to nahin kahte ki gham kah nahin sakte | हम ये तो नहीं कहते कि ग़म कह नहीं सकते

  - Bahadur Shah Zafar
हमयेतोनहींकहतेकिग़मकहनहींसकते
परजोसबब-ए-ग़महैवोहमकहनहींसकते
हमदेखतेहैंतुममेंख़ुदाजानेबुतोक्या
इसभेदकोअल्लाहकीक़समकहनहींसकते
रुस्वा-ए-जहाँकरताहैरोरोकेहमेंतू
हमतुझेकुछदीदा-ए-नमकहनहींसकते
क्यापूछताहैहमसेतूशोख़सितमगर
जोतूनेकिएहमपेसितमकहनहींसकते
हैसब्रजिन्हेंतल्ख़-कलामीकोतुम्हारी
शर्बतहीबतातेहैंसमकहनहींसकते
जबकहतेहैंकुछबातरुकावटकीतिरेहम
रुकजाताहैयेसीनेमेंदमकहनहींसकते
अल्लाहरेतिरारो'बकिअहवाल-ए-दिलअपना
देदेतेहैंहमकरकेरक़मकहनहींसकते
तूबा-ए-बहिश्तीहैतुम्हाराक़द-ए-रा'ना
हमक्यूँँकरकहेंसर्व-ए-इरमकहनहींसकते
जोहमपेशब-ए-हिज्रमेंउसमाह-ए-लक़ाके
गुज़रेहैं'ज़फ़र'रंजअलमकहनहींसकते
  - Bahadur Shah Zafar
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