mar ga.e ai waah un ki naaz-bardaari men ham | मर गए ऐ वाह उन की नाज़-बरदारी में हम

  - Bahadur Shah Zafar
मरगएवाहउनकीनाज़-बरदारीमेंहम
दिलकेहाथोंसेपड़ेकैसीगिरफ़्तारीमेंहम
सबपेरौशनहैहमारीसोज़िश-ए-दिलबज़्ममें
शम्असाँजलतेहैंअपनीगर्म-बाज़ारीमेंहम
यादमेंहैतेरेदमकीआमद-ओ-शुदपुर-ख़याल
बे-ख़बरसबसेहैंइसदमकीख़बरदारीमेंहम
जबहँसायागर्दिश-ए-गर्दूंनेहमकोशक्ल-ए-गुल
मिस्ल-ए-शबनमहैंहमेशागिर्याज़ारीमेंहम
चश्मदिलबीनाहैअपनेरोज़शबमर्दुमाँ
गरचेसोतेहैंब-ज़ाहिरपरहैंबेदारीमेंहम
दोशपररख़्त-ए-सफ़रबाँधेहैक्याग़ुंचासबा
देखतेहैंसबकोयाँजैसेकितय्यारीमेंहम
कबतलकबे-दीदसेयारबरखेंचश्म-ए-वफ़ा
लगरहेहैंआजकलतोदिलकीग़म-ख़्वारीमेंहम
देखकरआईनाक्याकहताहैयारोअबवोशोख़
माहसेसदचंदबेहतरहैंअदा-दारीमेंहम
'ज़फ़र'लिखतूग़ज़लबहरक़वाफ़ीफेरकर
ख़ामा-ए-दुर-रेज़सेहैंअबगुहर-बारीमेंहम
  - Bahadur Shah Zafar
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