ik tahee-dast se kya kya tan-e-faani maange | इक तही-दस्त से क्या क्या तन-ए-फ़ानी माँगे

  - Badr Mohammadi
इकतही-दस्तसेक्याक्यातन-ए-फ़ानीमाँगे
साया-ए-ज़ीस्तमेंहैनक़्ल-ए-मकानीमाँगे
पैकर-ए-नाज़सेदिलईज़ा-रसानीमाँगे
अक़्लहैरानहैयेकैसीगिरानीमाँगे
आरज़ूमेरीअभीमिस्रकेबाज़ारमेंहै
येज़ुलेख़ाकहींयूसुफ़-ए-सानीमाँगे
औरकुछमुझकोदिखाईपड़ेऐसानहीं
हाँमिरीआँखफ़क़तजल्वा-ए-जानीमाँगे
आसमाँसुर्ख़हुआगर्मनदीसूखीहुई
तिश्नामौसमहैमिरेजिस्मसेपानीमाँगे
'बद्र'आसाँनहींशाइ'रकाग़ज़ल-ख़्वाँहोना
येनहींजादूमगरजादू-बयानीमाँगे
  - Badr Mohammadi
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