ab un ka gham bhi ha | अब उन का ग़म भी हमें दिल-कुशा सा लगता है

  - Badar Shamsi
अबउनकाग़मभीहमेंदिल-कुशासालगताहै
येअजनबीतोहमेंआश्नासालगताहै
फ़रेब-ख़ुर्दा-ए-रस्म-ए-वफ़ासालगताहै
येज़ख़्म-ए-दिलकिजोहँसताहुआसालगताहै
ख़ुदअपनेदिलसेतराशाहैजोसनममैंने
ख़ुदानहींहैवोलेकिनख़ुदासालगताहै
मिलाहैजिसकोमिरीबंदगीकाहुस्न-ए-ख़ुलूस
वोनक़्श-ए-सज्दातिरेनक़्श-ए-पासालगताहै
कभीकभीतिरीयादोंकीअंजुमनमेंयेदिल
ख़ुदअपनेआपसेरूठाहुआसालगताहै
रुख़-ए-हयातयेहल्कासाइकतबस्सुमभी
ग़म-ए-हयातकामाराहुआसालगताहै
बदलगईहैयेकिसकीनज़रख़ुदाजाने
रुख़-ए-हयातबदलताहुआसालगताहै
येदाग़-ए-दिलहैंकि'बद्र'हसरतोंकेसनम
ख़ुदाकाघरहैमगरबुत-कदासालगताहै
  - Badar Shamsi
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